Aadhunik Sahitya Aur Sahityekaar (Paperback)

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About the Book

प्रस्तुत पुस्तक में पच्चीस लेख या निबन्ध संगृहीत हैं, जिनमें आधुनिक युग के प्रमुख साहित्यकारों एवं उनकी महत्त्वपूर्ण कृतियों पर निजी दृष्टिकोण से विचार किया गया है। इसके अन्तर्गत भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से लेकर रामधारी सिंह "दिनकर" तक आधुनिक युग के प्रतिनिधि कवियों एवं प्रमुख नाटककारों, उपन्यासकारों, समीक्षकों आदि का प्रतिनिधित्व हो गया है। इसी प्रकार "कामायनी", "उर्वशी", "गोदान", "मृगनयनी" जैसी प्रमुख रचनाओं पर भी इसमें लेख हैं।
अतः यहाँ इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि प्रस्तुत कृति में हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल की कतिपय महान विभूतियों एवं प्रमुख रचनाओं के कुछ विशिष्ट पक्षों पर ही विचार हो सका है।
प्रस्तुत कृति के अन्तर्गत विभिन्न साहित्यकारों या उनकी रचनाओं के विभिन्न पक्षों का विवेचन-विश्लेषण करते समय तदविषयक परम्परागत मतों एवं अवधारणाओं का उल्लेख यथोचित रूप में किया गया है, किन्तु साथ ही लेखक ने अपनी दृष्टि एवं निजी अनुभूति को भी आधार बनाया है। अतः इसमें लेखक के निष्कर्ष मौलिक हैं।
अस्तु, इसमें कोई सन्देह नहीं कि इसके द्वारा आधुनिक युग के प्रमुख साहित्यकारों एवं रचनाओं के अध्ययन, विवेचन एवं विश्लेषण की दृष्टि से प्रस्तुत कृति अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है।

About the Author/s

डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त (1928 ई.) हिन्दी के यशस्वी साहित्यकार एवं समालोचक हैं। आपने क्रमशः पंजाब विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी में एम.ए. (हिन्दी), पी.एच.डी. एवं डी. लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। उन्होंने 1964 से 1978 ई. तक विभिन्न विश्वविद्यालयों में हिन्दी साहित्य का प्राध्यापन कार्य किया। 1974 ई. में पंजाब विश्वविद्यालय-स्नातकोत्तर अध्ययन केन्द्र, रोहतक के निदेशक पद पर प्रतिष्ठित हुए। तदनन्तर 1976 से 1978 ई. तक महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक में कुलानुशासक, अधिष्ठाता, भाषा-संकाय आदि पदों पर कार्य किया। 1978 ई. से 1984 तक हिमालय प्रदेश-विश्वविद्यालय, शिमला एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में क्रमशः कुलपति के रूप में कार्य किया।
प्रकाशित मौलिक कृतियाँ ‘साहित्यिक निबन्ध’ (1959 ई.), हिन्दी काव्य में श्रृंगार परम्परा और महाकवि बिहारी (1960 ई.), ‘साहित्य-विज्ञान’ (1964 ई.), ‘हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’ (1965 ई.), ‘आधुनिक साहित्य और साहित्यकार’ (1966 ई.), ‘बिहारी सतसईः वैज्ञानिक समीक्षा’ (1967 ई.), ‘महादेवीः नया मूल्यांकन’ (1968 ई.), ‘रस-सिद्धान्त का पुनर्विवेचन’ (1971 ई.), ‘आदिकाल की प्रामाणिक रचनाएँ’ (1975 ई.), ‘हिन्दी साहित्यः परम्परागत विवाद एवं नये समाधान’, ‘हिन्दी साहित्येतिहासः परम्परागत दृष्टिकोण एवं नये सिद्धान्त’ आदि। विभिन्न रचनाओं पर आप सात राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।
आपके द्वारा प्रतिपादित मौलिक सिद्धान्तों में ‘साहित्य की आत्माः आकर्षण शक्ति’, ‘साहित्य की विकास-प्रक्रिया’, ‘बौद्धिक-रस’ आदि उल्लेखनीय हैं। इनके अतिरिक्त आपने ‘साहित्य-विज्ञान’, ‘साहित्येतिहास की वैज्ञानिक व्याख्या’ आदि नये विषयों की भी स्थापना की है।



More Information
ISBN-139788126917181
AuthorGanpati Chandra
Weight0.5000
Original PriceINR 80
Publication Year1990
LanguageHindi
PublisherAtlantic Publishers and Distributors (P) Ltd
SubjectHindi Literature
BindingPaperback
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