Bodh Dharma : Nai Sadi — Nai Dristi (Hardbound)

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About the Book

महात्मा बुद्ध विश्व की एक ऐसी विभूति थे, जिन्होंने दुःख, नैराश्य एवं मुत्युबोध में डूबी हताश मानवता को मुक्ति का पथ दिखाया। उन्होंने मानव मात्रा की इयत्ता को सर्वोपरि मानते हुए दुखों से निवृत्ति हेतु अष्टांग मार्ग की राह दिखाई। सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वचन, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीवन, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति तथा सम्यक् समाधि के द्वारा एक व्यक्ति अपने जीवन को पावनता एवं सदाचार के साथ जी सकता है। बुद्ध की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ पौरोहित्यवाद, छुआछूत तथा जाति प्रथा का विरोध करना थीं। उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति को एक माना। जब आश्वलायन नामक ब्राह्मण ने ब्राह्मणों की वर्ण श्रेष्ठता तथा ब्रह्मा के स्वाभाविक उत्तराधिकारी होने जैसे तर्कों से बुद्ध के समक्ष ब्राह्मणत्व की श्रेष्ठता का बखान करने का प्रयास किया तो महात्मा बुद्ध ने यह कहकर उसे निरुत्तर कर दिया कि ब्राह्मण भी अन्य जाति के लोगों की भांति जन्म लेते हैं, उनकी पत्नियाँ भी अन्य स्त्रियों की भाँति ही ट्टतुमती होती हैं तथा सन्तानोत्पत्ति करती हैं और उन्हें दूध पिलाती हैं, फिर उनमें औरों से अन्तर क्यों माना जाए। यही कारण था कि बौद्ध धर्म में जातिगत-वर्णगत श्रेष्ठता का दंभ कभी जड़ें नहीं जमा सका।
बुद्ध के स्त्री सम्बन्धी विचारों को तत्कालीन सामाजिक परिप्रेक्ष्य में अत्यन्त प्रगतिशील माना जाना चाहिए। आज से 2500 वर्ष पूर्व स्त्रियों को धम्म दीक्षा देना एक क्रांतिकारी कदम कहा जा सकता है। आतंक, अत्याचार, सामाजिक भेदभाव से पीड़ित वर्तमान समय में बौद्ध दर्शन की आवश्यकता सम्पूर्ण विश्व में महसूस की जा रही है। यह पुस्तक उन सभी पहलुओं से बौद्ध दर्शन की पड़ताल करती है, जिनके माध्यम से वर्तमान समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है।

About the Author/s

डॉ. पुनीत बिसारिया लेखन क्षेत्र का एक सुपरिचित नाम है। आप नए एवं विचारोत्तेजक विषयों पर लिखने के लिए जाने जाते हैं। ‘जिन्ना का सच’, ‘शोध कैसे करें’, ‘वेदबुक से फेसबुक तक स्त्री’, ‘पण्डित मदनमोहनमालवीय’, ‘विष्णु के दशावतार रूप’, ‘भारतीय संविधान के निर्माता’, ‘हिन्दी पत्रकारिताः कल आज और कल’, ‘पर्यावरण चिन्तन’, ‘भोजपुरी विमर्श’, ‘बीरबल साहनी’, आदि उनकी महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं। उन्होंने शेषराव चव्हाण की पुस्तक The Betrayal of Dr. Babasaheb Ambedkar का अनुवाद, ‘अम्बेडकर की अन्तर्वेदना’ शीर्षक से, तथा न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी की जीवनी Rule of the Heart का अनुवाद ‘सदय न्यायमूर्ति’ शीर्षक से किया है। वे ‘युगशिल्पी शोध जर्नल’ के कार्यकारी सम्पादक हैं। सम्प्रति, वे बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी से सम्बद्ध नेहरू पी.जी. कॉलेज, ललितपुर में हिन्दी प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं तथा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला द्वारा उन्हें एसोशिएटशिप प्रदान की गयी है।
डॉ. राजनारायण शुक्ल कथा साहित्य के अधिकारी विद्वान माने जाते हैं। मोहन राकेश के कथा साहित्य को उद्घाटित करती उनकी दो पुस्तकें ‘आधुनिकता बोध एवं मोहन राकेश का कथा-साहित्य’ तथा ‘मोहन राकेश के कथा-साहित्य का शिल्पगत अध्ययन’ प्रकाशित हो चुकी हैं। आप ‘युगशिल्पी शोध जर्नल’ तथा Indian Journal of Social Concerns के सम्पादक हैं। सम्प्रति, वे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध शम्भूदयाल पी.जी. कॉलेज, गाजियाबाद में हिन्दी प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं तथा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला द्वारा उन्हें एसोशिएटशिप प्रदान की गयी है।

More Information
ISBN-139788126920778
AuthorDr. Puneet Bisaria & Dr. Rajnarain Shukal
Weight0.5000
Original PriceINR 695
Publication Year2015
LanguageHindi
Pages312
PublisherAtlantic Publishers and Distributors (P) Ltd
SubjectReligion | Philosophy
BindingHardbound
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